Thursday, 25 October 2012

भाजपा की दिल्ली विजय पर भारी 4 विजय

दिल्ली भाजपा  के   राजनैतिक भविष्य  पर  प्रश्न ?

  दिल्ली भाजपा के चार विजयों  के  समूहका एक साथ एक क्षेत्र में एक समय पर काम करना   आगामी चुनावों में राजनैतिक भविष्य  के लिए चिंता प्रद है। इनमें आपसी तालमेल बेहतर  बनाने के लिए किसी मजबूत व्यक्तित्व की व्यवस्था  समय रहते कर  लेना उत्तम होगा ।  

  विजयेंद्रजी -विजयजोलीजी- विजयकुमारमल्होत्राजी - विजयगोयलजी-विजय शर्मा जी 

  इनका  पारस्परिक असहयोग दिल्ली भाजपा में माथे पर मौर नहीं चढ़ने देता है साहब सिंह जी के बाद दिल्ली भाजपा का भविष्य इन्हीं लोगों केहाथों में रहा इनके आलावा जिनकेहाथों में गया भी वो इतने कमजोर थे विजयों पर विजय पा पाना उनके वश में नहीं था जहाँ तक किरण वेदी जी के हाथ हैं ये भाजपा का पंचविजयी योग के सामने टिक नहीं पाएँगे किरन जी को थक हार कर या तो किनारा करना पड़ेगा या तो चुपचाप मूकदर्शकी भावना से देखते रहना होगा!किरण वेदी जी में यदि इस ज्योतिषीय कुयोग  को तोड़ने की क्षमता ही होती तो अन्ना का आंदोलन इस प्रकार से बीच में ही क्यों म तोड़ देता !आखिर उस आंदोलन को भी तो इसी एकनाम योग ने ही ध्वस्त किया है ! 

आप स्वयं देखिए -अन्ना एवं अरविन्द केजरी वाल के बीच बढ़ते विवाद के विषय में ज्योतिषीय सफाई !see more... http://snvajpayee.blogspot.in/2013/11/blog-post_681.html

अरविन्द केजरीवाल से यदि अन्नाहजारे की नहीं पटी तो पटेगी आम आदमी पार्टी की भी नहीं !see more …http://snvajpayee.blogspot.in/2013/12/blog-post_7.html


किन्हीं दो या दो से अधिक लोगों का नाम यदि एक अक्षर से ही प्रारंभ होता है तो ऐसे सभी लोगों के आपसी संबंध शुरू में तो अत्यंत मधुर होते हैं बाद में बहुत अधिक खराब हो जाते हैं, क्योंकि इनकी पद-प्रसिद्धि-प्रतिष्ठा -पत्नी-प्रेमिका आदि के विषय में पसंद एक जैसी होती है। इसलिए कोई सामान्य मतभेद भी कब कहॉं कितना बड़ा या कभी न सुधरने वाला स्वरूप धारण कर ले या शत्रुता में बदल जाए कहा नहीं जा सकता है। 

जैसेः-राम-रावण, कृष्ण-कंस आदि। इसी प्रकार और भी उदाहरण हैं।

   कलराजमिश्र-कल्याण सिंह  

  ओबामा-ओसामा   

  अरूण जेटली- अभिषेकमनुसिंघवी

  मायावती-मनुवाद

नरसिंहराव-नारायणदत्ततिवारी 

लालकृष्णअडवानी-लालूप्रसाद 

 परवेजमुशर्रफ-पाकिस्तान 

 भाजपा-भारतवर्ष  

 मनमोहन-ममता-मायावती    

   उमाभारती -   उत्तर प्रदेश 
अमरसिंह - आजमखान - अखिलेशयादव 

 अमरसिंहअनिलअंबानीअमिताभबच्चन

 नितीशकुमार-नितिनगडकरी-नरेंद्रमोदी    प्रमोदमहाजन-प्रवीणमहाजन-प्रकाशमहाजन अन्नाहजारे-अरविंदकेजरीवाल-असीम त्रिवेदी-अग्निवेष- अरूण जेटली - अभिषेकमनुसिंघवी

दिल्ली भाजपा  के  चार    विजय

              विजयेंद्र-विजयजोली

              विजयकुमारमल्होत्रा- विजयगोयल,

  अन्ना हजारे के आंदोलन के तीन प्रमुख ज्वाइंट थे अन्ना हजारे , अरविंदकेजरीवाल एवं अग्निवेष जिन्हें एक दूसरे से तोड़कर ये आंदोलन ध्वस्त किया जा सकता था। इसमें अग्निवेष कमजोर पड़े और हट गए। दूसरी ओर जनलोकपाल के विषय में लोक सभा में जो बिल पास हो गया वही राज्य सभा में क्यों नहीं पास हो सका इसका एक कारण नाम का प्रभाव भी हो सकता है। सरकार की ओर से अभिषेकमनुसिंघवी थे तो विपक्ष के नेता अरूण जेटली जी थे। इस प्रकार ये सभी नाम अ से ही प्रारंभ होने वाले थे। इसलिए अभिषेकमनुसिंघवी की किसी भी बात पर अरूण जेटली का मत एक होना ही नहीं था।अतः राज्य सभा में बात बननी ही नहीं थी। दूसरी  ओर अभिषेकमनुसिंघवी और अरूण जेटली का कोई भी निर्णय अन्ना हजारे एवं अरविंदकेजरीवाल को सुख पहुंचाने वाला नहीं हो सकता था। अन्ना हजारे एवं अरविंदकेजरीवाल का महिमामंडन अग्निवेष कैसे सह सकते थे?अब अन्ना हजारे एवं अरविंदकेजरीवाल कब तक मिलकर चल पाएँगे?कहना कठिन है।असीमत्रिवेदी भी अन्नाहजारे के गॉंधीवादी बिचारधारा के विपरीत आक्रामक रूख बनाकर ही आगे बढ़े। आखिर और लोग भी तो थे।  अ अक्षर से प्रारंभ नाम वाले लोग ही अन्नाहजारे  से अलग क्यों दिखना चाहते थे ? ये अ अक्षर वाले लोग  ही अन्नाहजारे के इस आंदोलन की सबसे कमजोर कड़ी हैं।

अन्नाहजारे की तरह ही अमर सिंह जी भी अ अक्षर वाले लोगों से ही व्यथित देखे जा सकते हैं। अमरसिंह जी की पटरी पहले मुलायम सिंह जी के साथ तो खाती रही तब केवल आजमखान साहब से ही समस्या होनी चाहिए थी किंतु अखिलेश  यादव का प्रभाव बढ़ते ही अमरसिंह जी को पार्टी से बाहर जाना पड़ा। ऐसी परिस्थिति में अब अखिलेश के साथ आजमखान कब तक चल पाएँगे? कहा नहीं जा सकता। पूर्ण बहुमत से बनी उत्तर प्रदेश  में सपा सरकार का यह सबसे कमजोर ज्वाइंट सिद्ध हो सकता है
       चूँकि अमरसिंह जी के मित्रों की संख्या में अ अक्षर से प्रारंभ नाम वाले लोग ही अधिक हैं इसलिए इन्हीं लोगों से दूरियॉं बनती चली गईं। 

जैसेः- आजमखान अमिताभबच्चन  अनिलअंबानी  अभिषेक बच्चन आदि।
राहुलगॉधी - रावर्टवाड्रा - राहुल के पिता  श्री राजीव जी इन दोनों पिता पुत्र का नाम रा अक्षर  से था इसीप्रकार रावर्टवाड्रा  और उनके पिता श्री राजेंद्र जी इन दोनों पिता पुत्र का नाम  भी रा अक्षर  से ही था। दोनों को पिता के साथ अधिक समय तक रहने का सौभाग्य नहीं मिल सका ।
    अब राहुलगॉधी के राजनैतिक उन्नत भविष्य  के लिए रावर्टवाड्रा  का सहयोग सुखद नहीं दिख रहा है क्योंकि  यहॉं भी दोनों का नाम  रा अक्षर  से ही है।

  इसीप्रकार भारतवर्ष  में भाजपा की  स्थिति है इसीलिए उसे राजग का गठन करना पड़ा जबकि

भाजपा से कम सदस्य संख्या वाले अन्यलोग  पहले भी प्रधानमंत्री बन चुके हैं


No comments:

Post a Comment