Wednesday, 17 October 2012

Arthashastra ka Anarth

                    अर्थशास्त्री का अनर्थशास्त्र   

 

     लंबे  समय  तक सत्ता  में  रहने के बाद भी  समाज की समस्याएँ   तो कम नहीं ही हुईं अपितु भ्रष्टाचार   महॅंगाई आदि चर्म सीमा तक बढ़ी।इस प्रकार की  दुर्व्यवस्थाओं के वाब्जूद बिना किसी क्षमा याचना या बिना कोई प्रायश्चित्त किए पुनः सत्ता की भीख मॉंगते घूमना कितना उचित है ?आखिर जनता को मूर्ख क्यों समझा जा रहा है? गैस बिजलीबिल आदि और भी जीवनोपयोगी चीजों की महॅंगाई आम आदमी कैसे सहे ? कैसे बच्चों का पालन पोषण करे, कैसे उन्हें पढ़ावे लिखावे ?कैसे कन्याओं के शादी संबंध करे ? प्रधानमंत्री, जी भूख तो समय से लगती है।
    इसका एक मात्र कारण यह है कि व्यक्तिगत जीवन आपका हो सकता है कि अच्छा हो किंतु राजधर्म निभाने में प्रधानमंत्री जी आप असफल रहे हैं। गैस, बिजलीबिल, आदि और भी जीवनोपयोगी चीजों की महॅंगाई का असर बेशक आप पर न पड़ता हो किंतु आम आदमी मरा जा रहा है। आपके अर्थशास्त्री होने  का  यही  लाभ   जनता को  मिला है  महोदय उसके पेट पर लात लगी है। समाज आपके राजसी स्वरूप को ध्यान में रखकर आज से हमेशा  आपको कोसता रहेगा। यहाँ इस बात को उदधृत करने का हमारा अभिप्राय मात्र इतना है कि सत्ता के शीर्ष  पर कठोर निर्णय ले सकने में सक्षम एवं सतर्क महापुरूष  चाहिए जो ताकत प्रधानमंत्री जी आपके पास नहीं दिखी कारण ज्ञात नहीं है।

     महत्त्वपूर्ण अवसरों पर मौन या तटस्थ रहना एवं अपने दायित्व का सम्यक निर्वाह न कर पाना भी पाप की श्रेणी में गिना जाता है।घोटाले, भ्रष्टाचार   क्या कुछ बाकी रहा आपके  शासन में ? मंत्रियों ने भी लूटने में कसर नहीं छोड़ी है।जॉंच होगी वे जेल जाएँगे उससे क्या होता है?घर वालों के लिए कमा कर रख दिया है उन्हें वहॉं खाने को मिलेगा ही जॉंच तो जनता का मुख बंद करने के लिए होती है। इससे ज्यादा तो कभी कुछ दिखा नहीं।
    कृपा पूर्वक प्राप्त हुए राज्य के एहसान भाव से बोझिल भारत के प्रधानमंत्री जी आपका सभी मुद्दों  पर दुविधा ग्रस्त होना स्वाभाविक है। समय पास करने वाला राजा विशेष दुखदायी होता है। जिसे जनता भोग रही है।

                                                             राम राम ।

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