Wednesday, 17 October 2012

Balkrishan ki digree

          फर्जी डिग्री वाले   सभी  समान अपराधी

     बाबा जी के सहयोगी फर्जी डिग्री मामले में आरोपी बड़बोले वैद्य की आयुर्वेदिक बहादुरी का यदि कहीं कोई साइड इफेक्ट हुआ ही हो तो उसका जिम्मेदार सरकार के अलावा और कौन है ? फर्जी डिग्रियों की चर्चा करते समय एक विशेष बात यह ध्यान देनी चाहिए कि बालकृष्ण को निशाना बनाकर कार्यवाही ठीक नहीं है। फर्जी डिग्रियों वाले सभी व्यक्तियों  को लक्ष्य बनाकर यदि कार्यवाही की जाए तो उचित ही नहीं आवश्यक भी है। सरकार की निष्पक्षता भी तभी प्रकट होगी।
    तन के चिकित्सकों के लिए यदि संबंधित विषय में डिग्री लेनी  आवश्यक है तो ज्योतिष एवं वास्तु जैसे मन के चिकित्सकों के लिए ऐसा कानून क्यों नहीं है? आज टी.वी. चैनलों अखवारों या सभी प्रकार के विज्ञापनों में ज्योतिष और वास्तु के नाम पर प्रायः फर्जी डिग्रियों वाले व्यक्ति ही मनगढंत बकवास करते देखे सुने जा सकते हैं। ऐसी बकवासों का शास्त्रों  या विश्वविद्यालयीय पाठ्यक्रमों  से लगभग कोई लेना देना नहीं है। ज्योतिष एवं वास्तु आदि के नाम पर लाखों घर उजड़े,विवाह टूटे, बहू बेटियों की इज्जत के साथ खेला जा रहा है। ऐसे भविष्य बकवासियों की डिग्रियों की जाँच करके क्या कार्यवाही की गई,यदि नहीं तो क्यों ?यदि यही सब होना था तो करोड़ों अरबों रूपये लगाकर चलाए जा रहे संस्कृत विश्व विद्यालयों का उद्देश्य और जनहित में लाभ क्या है ? आखिर ऐसे सभी फर्जी डिग्री वालों पर कार्यवाही करने का दायित्व भी तो प्रधानमंत्री होने के नाते उन्हीं का था। यदि  बेलगाम सभी शास्त्रीय अपराधी घूम रहे हैं तो फर्जी डिग्रियों की चर्चा करते समय केवल बालकृष्ण को निशाना बनाकर कार्यवाही ठीक नहीं है। प्रधान मंत्री जी कम से कम कार्यवाही तो निष्पक्ष होनी चाहिए । 

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