Saturday, 20 October 2012

R.T. I. se pareshan Log?

     

          सूचना का अधिकार कानून के दुरूपयोग 

                                       से 

                        प्रधानमंत्री जी परेशान

    बात बनारस की है  पहले चोर पकड़ने के लिए खोजी कुत्ते छोड़े जाते थे फिर धीरे धीरे जब वे नहीं दिखाई पड़ने लगे तो इसका कारण बनारस में एक पुलिस वाले महाशय से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पहले जो कुत्ते चोरों के घर घुसते थे अब छोड़े गए वे ही खोजी कुत्ते थाने में घुस आते हैं। इसलिए थाने की निजता संदेह के घेरे में आती थी जो ठीक नहीं था।
     किस कानून के दुरूपयोग को रोकने के कितने और कैसे प्रयास किए जा रहे हैं। सी.बी.आई.पर भी इस तरह के आरोप अक्सर लगते रहते हैं। विपक्ष ही नहीं आम जनता में इस तरह की ही धारणा है।उत्तर प्रदेश  की पूर्व मुख्यमंत्री की हाल ही में हुई रैली में केंद्र सरकार  की नीतियों के खिलाफ उनका गंभीर गर्जन सुन कर लोग हॅंस रहे थे कि यदि इन्होंने केंद्र सरकार से पंगा लिया तो उनके पीछे सी.बी.आई. छोड़ दी जाएगी। इसी बीच अगले ही दिन उन्हें भी शायद यह बात समझ में आ गई और वे अपने रूख पर कायम न रह सकीं। इससे जनता में व्याप्त धारणा की पुष्टि  भी हुई।
     इसी प्रकार ढोंगी बाबा के प्रकरण को ही लिया जाए तो उसके गुरू जब गायब हुए थे तब से अभी तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई अब उसने सरकार से पंगा लिया तो उसके पीछे सी.बी.आई. छोड़ दी जाएगी और थोड़े दिन बाद सब कुछ ठीक मान लिया जाएगा।आखिर यह सब हो क्या रहा है?
     घोटाले का आरोप कानूनमंत्री पर जेल में ठूँसे जा रहे विकलांग लोग। फैसला देने का काम न्यायालय का है किंतु सरकारी पार्टी के महासचिव ने जॉंच के पहले ही फैसला सुना दिया कि कानूनमंत्री निर्दोष हैं 

 यह कहीं संबद्ध जॉंच कर्मियों के अधिकार क्षेत्र की सीमा रेखा खींचे जाने का प्रयास तो नहीं है।ये तो  उसी तरह की बात हुई  जैसे -

      एक गॉंव में एक पंडित जी रहते थे वे पूरे गॉंव में  पंडिताई करते थे जब  कहीं किसी से कोई गलती हो जाती थी तो लोग उनके पास जाते और पंडित जी से पूछते कि इसका प्रायश्चित्त कैसे होगा?तो पंडित जी उसे मोटा दान धर्म बता दिया करते वो सब उन्हें ही मिलता था।
      पंडित जी के  बेटे का नाम संतोष  था। एक दिन कुछ बच्चे खेल रहे थे उनसे एक गधा मर गया। पहले की तरह पूरा गॉंव फिर पंडित जी के पास पहुँचा तो पंडित जी ने प्रायश्चित्त में बहुत सारा दान धर्म करने को बता दिया। यह सुनकर लोंगों ने कहा कि पंडित जी ये सब प्रायश्चित्त तो आप को करना है क्योंकि आपके बेटे संतोष ने ही गधा मारा है।
       यह सुनकर  पंडित जी हॅंसकर कहने लगे कि जहॉं हमार संतोष  वहॉं गधा मारने से कौन दोष  ?         

       इसलिए व्यक्तिगत तौर पर हमारे जैसे कुछलोग भले यह  स्वीकार कर लें कि हो सकता है ये  आरोप ही गलत हो किंतु एक आम आदमी के आरोप पर ही सीता को बनवास हुआ था।ये हमारा पवित्र इतिहास है। उस पवित्र परंपरा के उत्तराधिकारी हैं आज के प्रशासक।केवल रामलीला मैंदान में दशहरा मेले में जाकर तीर मार देने से कोई रामबादी नहीं हो जाता है प्रधानमंत्री जी! यदि किसी दामाद या कानूनमंत्री  के प्रति देश के मन में शंका हो ही गई है तो विश्वास बचाए रखने के लिए जाँच क्यों नहीं करा लेनी  चाहिए ?

       भारतीय भावुक एवं भक्त जनता रामायण आदि धार्मिक ग्रंथ पढ़ती है और उनके सद्गुण अपने प्रशासकों में ढूंढने लगती है।ये उसका भोलापन है।
     जहॉं तक मैंने समाचार पत्रों  में पढ़ा है कि प्रधानमंत्री जी की पार्टी की अधिष्ठात्री देवी की विदेश  यात्रा में खर्चे से जुड़ा सवाल था।संभवतः इसीलिए प्रधानमंत्री जी को इतना बोलना पड़ा अन्यथा किसी आम आदमी की निजता का किसे ध्यान है?हो सकता है कि दुरूपयोग की खबरें पहले भी आई हों किंतु वे आम जनता से जुड़ी हों अब खास की बात है।उसके लिए तो कानून क्या सब कुछ बदला जा सकता है। जिसने इतने बड़े पद तक पहुंचाया उसे छोड़कर किसी आम वाम जनता से किसी को  क्या लेना देना?

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