Saturday, 3 November 2012

अंधविश्वासों पर लगाम आखिर कैसे लगाई जाए ?

                 फर्जी डिग्री वाले ज्योतिषी

      विदित हो कि ज्योतिष तंत्र मंत्र के विषय में अंधविश्वास  फैलाने का काम आज सारे देश में खूब फल फूल रहा है। समाज से लेकर टी.वी.चैनल पत्र पत्रिकाओं सहित विज्ञापन की लगभग सारी विधाएँ इस कारोबार में विशेष रूचि ले रहीं हैं। ज्योतिष  विषय में एम.ए. पी.एच.डी. आदि डिग्री वाले लोगों की योग्यता की गारंटी विज्ञापन एजेंसियॉं नहीं लेती हैं जबकि फर्जी डिग्री वाले ज्योतिषियों को गारंटेड स्टैंप सुविधा मुहैया कराती हैं।परिस्थिति यहॉं तक पहुँच चुकी है कि भारत सरकार के द्वारा संचालित संस्कृत विश्व  विद्यालयों से निर्धारित पाठ्यक्रम का परिपालन करते हुए ज्योतिष  विषय में एम.ए. पी.एच.डी. आदि डिग्री ले चुके शास्त्रीय विद्वान आज मारे मारे फिर रहे हैं।

    जबकि फर्जी डिग्री या बिना डिग्री वाले अर्थात ज्योतिषीय अशिक्षित फिर भी ज्योतिष का कारोबार करने वाले लोग पैसे के द्वारा विज्ञापनों के बल पर विद्वान ज्योतिषी  होने का अपना प्रचार प्रसार करते रहते हैं और सरकार के द्वारा संचालित संस्कृत विश्व  विद्यालयों से प्रदान की जाने वाली सारी डिग्रियॉं अपने नाम के साथ लगाते हैं। ये सरकारी संस्कृत विश्व विद्यालयों के प्रमाणित निर्धारित पाठ्यक्रम एवं डिग्रियों का सरासर अपमान है। मान्यवर,यदि यही सही है तो कोई वर्षों तक परिश्रम करके क्यों पढ़ेगा? सरकारी संस्कृत विश्वविद्यालयों के महत्त्व एवं उस पर किए जाने वाले आर्थिक व्यय का औचित्य क्या  रह जाता है?

    नियमतः उनके द्वारा किया जाने वाला यह आचरण अपराध की श्रेणी में आता है साथ ही चिकित्सा आदि क्षेत्रों की तरह फर्जी डिग्रियॉं अपने नाम के साथ  लिखना भी कानूनन अपराध मानकर कार्यवाही की जानी चाहिए किंतु ऐसा कुछ  देखने सुनने  को नहीं मिलता है। ये सब कुछ बड़ी निर्भीकता पूर्वक टी.वी.चैनलों पर भी कहते देखा सुना जाता है। ऐसे लोग ज्योतिष  के नाम पर प्रायः अशास्त्रीय बोलते हैं इन लोगों की अंधविश्वास फैलाने में बड़ी भूमिका से इंकार कैसे किया जा सकता है? आखिर विज्ञापन में दी जाने वाली मोटी मोटी धनराशि  कोई अपने घर से कब तक और क्यों देगा? आखिर पैसे तो समाज से ही लेना है और सही बात से कोई कितने पैसे और क्यों दे देगा ?यदि ऐसा होता तोअंधविश्वास  न  फैलाने वाले शास्त्रीय ज्योतिषियों का भी कुछ तो महत्व मीडिया भी रखता ।

     अतः आप से निवेदन है कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया जैसी कोई नियामक संस्था ज्योतिष  के क्षेत्र में भी बनाई जाए या किसी अन्य मजबूत विकल्प की तलाश  होनी चाहिए। जिससे ज्योतिष  संबंधी सभी प्रकार के अपराधों एवं अंधविश्वासों पर नियंत्रण किया जा सके साथ ही शास्त्रीय विद्वानों एवं सरकारी संस्कृत विश्व विद्यालयों का गौरव सुरक्षित रखा जा सके।

      ऐसे पाखंडी लोग या तो ज्योतिष सिखाना  शुरू करते हैं या फिर देखावटी कुंडली देखना या कोई ज्योतिष विद्यालय बनाकर ज्योतिष पढ़ाने का नाटक करते हैं इसका समाज पर असर पड़ता है कि ये  यदि कुछ पढ़े लिखे न होते तो पढ़ाते कैसे !या कुंडली देख रहे हैं तो पढ़े ही होंगे !

     कुछ लोग एक आध चक्कर विदेश लगा आते हैं तो अपने नाम के साथ  वो तमगा लगा कर फिरने लगते हैं लोग सोचने लगते हैं कि जब ज्योतिष के लिए इनकी विदेशों तक में पूँछ है इसका मतलब ये ज्योतिषी तो होंगें ही किन्तु उन्हें क्या पता कि जिन देशों में कोई हिंदी ही नहीं जानता वहाँ संस्कृत में लिखी  गई ज्योतिष की कठिन सच्चाई कोई कैसे समझ पा रहा होगा। वहाँ तो अपने को कहा  कि हम ज्योतिषी हैं तो वे लोग एक श्लोक का अर्थ भी नहीं पूछ सकते इसीलिए धार्मिक शिक्षा चोर लोग जिस विषय का अपने को विद्वान कहलाना होता है उस विषय का लेवल लगाकर एकबार विदेश घूम आते हैं वापस आते ही ज्योतिषी या शास्त्रज्ञ हो जाते हैं ।अजीब बात है शास्त्रीय शिक्षा किसकी कितनी है इसे कोई विदेशी क्या प्रमाणित करेगा ये तो भारतीय शिक्षा पद्धति से ही प्रमाणित होगी। 

      इसलिए  ज्योतिष  देखने के लिए ग्रह और उनकी  दशा आवश्यक होती है किन्तु आजकल कोई तो राशि पूछ कर सब कुछ बताने की बात करता है  कोई तो चड्ढी बनियान देखकर भविष्य बताने का दावा करता है कोई क्रिस्टल बाल तो कुछ लोग टैरो कार्ड देखकर भविष्य भौंकने का दावा ठोंकते हैं सबसे बड़ी बेशर्मी इस बात की है कि ये सब अशास्त्रीय कार्य करने वाले पाखंडी लोग अपने को ज्योतिषाचार्य भी कहते हैं क्या उन्हें पता है कि ज्योतिषाचार्य का अर्थ किसी विश्व विद्यालय से ज्योतिष विषय में एम. ए. करना होता है और उस ज्योतिषाचार्य के पाठ्यक्रम में क्रिस्टल बाल या  टैरो कार्ड देखकर भविष्य जानने या बताने की विधा है ही नहीं, इनकी कोई चर्चा तक नहीं है!ऐसे ज्योतिष फ्राड लोगों ने ज्योतिष को एकदम उपहासास्पद  बना दिया है। 

    अतः ज्योतिष के नाम पर चल रही इस धोखाधड़ी को समाप्त करने के लिए अच्छे लोगों के द्वारा बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं आप भी इस शास्त्रीय जन जागरण में सहभागी बनें !इन ज्योतिषीय आशारामों से भी समाज को मुक्त करने के लिए प्रयास प्रारम्भ किए जा चुके हैं परिणाम  भी शीघ्र दिखने लगेंगे !धन्यवाद!!!

     


 


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