Sunday, 5 May 2013

भगवान श्री रामका जन्म कितने वर्ष पहले हुआ था ?

भगवान श्री राम सेतु का निर्माण  कब हुआ था ?

डॉ .शेष नारायण वाजपेयी 
     चूँकि हमारी पी.-एच.डी. की  थीसिस   का विषय  रामायण एवं ज्योतिष से ही सम्बंधित था इसलिए रामायण  से जुड़ी कोई घटना  कब घटी थी  यह जानने के लिए रामायण एवं ज्योतिष की ही जरूरत थी इसलिए मैंने न केवल शोध प्रबंध लिखा अपितु  श्री राम एवं रामसेतु नामकी  एक और पुस्तक लिखी जिसमें ज्योतिष के द्वारा यह निश्चित किया गया  है कि भगवान   श्री राम  का  जन्म एवं रामसेतु  का निर्माण 21 लाख 15 हजार 108 वर्ष  पहले  हुआ था। यह   कोई  कपोल  कल्पित  जानकारी  नहीं  है इसमें ज्योतिष एवं रामायण से सम्बंधित अनेक प्राचीन ग्रंथों के प्रमाण भी दिए गए हैं।

हमारा शोध प्रबंध 


                                                 श्री राम सेतु का चित्र 
 श्रीरामसेतुकेसमर्थनमें सरकार को संतोंकाशक्त संदेश 
                               ( दिल्ली रैली  में आयोजित विराट जन सभा में उमड़ा जन समुद्र )

   हनुमान चौक में  श्री राम सेतु समर्थकों की सभा के                            उत्साह  बर्द्धक  चित्र  
                        दिल्ली छाछी बिल्डिंग कृष्णानगर 


     इसीप्रकार न केवल सम्पूर्ण भारत वर्ष के अपितु समग्र विश्व के समर्पित श्री राम भक्तों की भावना का सम्मान करते हुए सरकार को चाहिए कि वह श्री राम सेतु  की सुरक्षा करे । 

राजेश्वरी प्राच्यविद्या शोध  संस्थान की अपील 

   यदि किसी को केवल रामायण ही नहीं अपितु  ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र आदि समस्त भारतीय  प्राचीन विद्याओं सहित  शास्त्र के किसी भी नीतिगत  पक्ष पर संदेह या शंका हो या कोई जानकारी  लेना चाह रहे हों।शास्त्रीय विषय में यदि किसी प्रकार के सामाजिक भ्रम के शिकार हों तो हमारा संस्थान आपके प्रश्नों का स्वागत करता है ।

     यदि ऐसे किसी भी प्रश्न का आप शास्त्र प्रमाणित उत्तर जानना चाहते हों या हमारे विचारों से सहमत हों या धार्मिक जगत से अंध विश्वास हटाना चाहते हों या राजनैतिक जगत से धार्मिक अंध विश्वास हटाना चाहते हों तथा धार्मिक अपराधों से मुक्त भारत बनाने एवं स्वस्थ समाज बनाने के लिए  हमारे राजेश्वरीप्राच्यविद्याशोध संस्थान के कार्यक्रमों में सहभागी बनना चाहते हों तो हमारा संस्थान आपके सभी शास्त्रीय प्रश्नोंका स्वागत करता है एवं आपका  तन , मन, धन आदि सभी प्रकार से संस्थान के साथ जुड़ने का आह्वान करता है। 

       सामान्य रूप से जिसके लिए हमारे संस्थान की सदस्यता लेने का प्रावधान  है।





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